राजस्थान के जालोर जिले का भीनमाल नगर का पुराना नाम श्रीमाला नगर था जो श्रीमाली ब्राम्हीन का उत्त्पत्ति स्थान है। लक्ष्मीजी के कहने से श्री विश्वकर्मा जी ने नगर बनाया था , जिनका आकार माला जैसा होने के कारन श्री विश्वकर्मा जी ने ही उनका नाम श्रीमाला नगर रखा था। लक्ष्मी जी को ब्रम्हीन प्रिया होने के कारन इस नगर मैं रहने के लिए ब्रम्हिनो को बुलाया था बाद मैं भील लोगो ने इस नगर पर कब्ज़ा जमाया अतः इस नगर का नाम भील्माल हो गया। जो अभी भीनमाल के नाम से प्रचलित है। भील लोगो के त्रास से ही ब्रम्हिनो ने ये नगर छोड़ दिया बाद मैं ये सभी श्रीमाली ब्राह्मिन, श्रीमाली वनिक (दशा अवं वीसा ) के रूप मैं जाने गए।श्रीमाली ब्रह्मिन के १४ गोत्र है , सभी गोत्र की कुल देवी माँ अवं कुल देवता महादेव जी भीनमाल मैं बिराजमान है।
यह जानकारी स्कन्द पूरण से पाए जाती है।
Maa vatyakshni, kuldevi of Parashar gotra Shreemali brahmin, temple located at Aaldi gam, Bhinmal, Rajasthan. 15 kms away from Bhinmal city of Rajasthan. A small temple was there previously, now a new temple is been made by devotee of mataji from Gujarat. keep watching this blog for further developments. Jai Mataji
शुक्रवार, 14 अगस्त 2009
शनिवार, 25 जुलाई 2009
आगे के विचार

माताजी की इच्छा से हमारा विचार है की मन्दिर पर आने वाले भक्तो के लिए ठहेरनी की व्यवस्था की जाए, इस विचार से हम २ या ३ कमरे बनवाना चाहते है। मेरी आपसब भक्तो से प्रार्थना है की आप अपने परिवार के साथ एक बार माताजी के दर्शन को अवय्श्य पधारे।
आप माताजी के बारे मैं ज्यादा जानकारी के लिए मुझे लिख सकते है ।
बुधवार, 14 जनवरी 2009
ये ब्लॉग हमारी कुलदेवी माँ वटयक्शनी जो पराशर गोत्र के ब्राह्मणों की कुल देवी है उनके लिए बनाया गया है। माँताज़ी का मन्दिर राजस्थान के भीनमाल स्थित शहर के पास एक छोटे से गाँव आल्दी मैं स्थित है। भीनमाल से तक़रीबन १५ किलोमीटर दूर है आल्दी गावं। दो साल पहले ये एक छोटा सा मन्दिर था जिसमें एक साथ २ भक्त भी खड़े नही रह सकते थे, माँ के कुछ भक्त जो गुजरात से थे उन्होंने नया मन्दिर बनवाया व् माताजी की प्रतिमाजी जो की पुराणी थी उनके साथ एक नई प्रतिमाजी का भी स्थापन किया।
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